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Friday, March 08, 2019

ख्वाहिशें

हल्की फुल्की सी है ज़िन्दगी
बोझ तो ख्वाहिशों का है।
ना जाने ये कैसा जाल
मन की साज़िशों का है।

सोचते थे... ख्वाहिशें ना हों, तो खुद से ऊब जाएंगे।
कहाँ पता था, ख्वाहिशों के समुंदर में खुद ही डूब जाएंगे।

सोचते थे... वो भी क्या दिन होगा, जब अपने बंगले की छत से उगता सूरज देख पाएँगे।
कहाँ पता था इस चाह में हम सूरज देखना ही भूल जाएँगे।

सपने पूरे करने चले थे... सपने देखना ही भूल गए।
ख्वाहिशों के बंधन में कुछ यूँ फंसे, ज़िन्दगी जीना ही भूल गए।

आज आया है होश फिर एक बार... इसे यूँ ही नहीं गंवाएँगे।
ख्वाब अभी भी सजाएँगे मगर, ये छोटी छोटी खुशियाँ नहीं भूल जाएँगे।

ज़िन्दगी के इस तराज़ू में... तौल कर कदम बढ़ाएँगे।
आगे तो बढ़ेंगे ही मगर, ज़रा थम कर इस पल का भी लुत्फ उठाएँगे।

हल्की फुल्की सी है ज़िन्दगी।
हंसी खुशी ही बिताएँगे।।

Thursday, December 29, 2011

#RandomThoughts


#3, November 25, 2013
वो हलकी सी मुस्कान पर दिल आ गया…
वो खिलखिलाती हसी से नशा सा छा गया।

उनकी एक-एक आदत पर कुर्बां है ये दिल…
जो उन्होंने एक बार देखा, तो मैं जन्नत पा गया।


#2, March 6, 2013
Some sleepless nights,
some wrongs n rights..
Some awkward times,
some broken rhymes!


#1, December 29, 2011
At times, I wonder what could have happened...
What if that one thing would have been different...
How much we'll think about it I wonder...
I guess the best thing is to simply surrender!
Lets just accept what is there,
who knows, what the future might bear!